- विशेष
प्रतिनिधि
पूर्व भाजपा अध्यक्ष एवं
पूर्व केंद्रीय मंत्री बंगारू लक्ष्मण को शनिवार को 11 साल पहले के एक कल्पित अस्त्र
सौदे में एक लाख रुपये रिश्वत लेने के मामले में दिल्ली के विशेष सीबीआई न्यायालय ने चार साल जेल
की सजा सुनाई। 11 साल पहले तलहका के स्टिंग ऑपरेशन में फंसे भारतीय जनता पार्टी
अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण रिश्वत लेने के दोषी करार दिए गए है।
कांग्रेस के मनीष तिवारी को यह कहने अक अवसर मिल गया था कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध
लड़ाई लड़ने का दावा करने वाली भाजपा को अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। वहीं
भाजपा ने यह कहते हुए बंगारू से दूरी बना ली है कि यह उनका निजी मामला है। ज्ञात
हो कि 11 साल पहले तलहका के स्टिंग ऑपरेशन में फंसने पर बीजेपी अध्यक्ष बंगारू
लक्ष्मण और रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को इस्तीफा देना पड़ा था। इस मामले में
फर्नांडिस की करीबी जया जेटली भी विवादों के घेरे में आ गई थीं।
शुक्रवार को न्यायालय के
निर्णय के तुरंत बाद पुलिस ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अतिरिक्त
सत्र न्यायाधीश कंवलजीत अरोड़ा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बंगारू लक्ष्मण को सेना को आपूर्ति की जाने वाली तापीय
दूरबीन का आदेश दिलाने के लिए एक नकली अस्त्र विक्रेता की रक्षा मंत्रालय में
अनुशंसा करने के एवज में रिश्वत लेने
का दोषी पाया। अदालत ने कल बंगारू को एक लाख
रुपये रिश्वत लेने का दोषी पाया था।जहां सीबीआई ने उनके लिए पांच साल की
सजा की मांग की थी वहीँ दूसरी ओर 72 वर्षीय बंगारू ने स्वास्थ्य आधार पर यह कहकर
नरमी बरते जाने का आग्रह किया था कि उनकी दो बार बाईपास सर्जरी हो चुकी है और
उन्होंने पहली बार अपराध किया है। उनकी राहत देने की अपील को रद्द करते हुए सत्र
न्यायाधीश ने चार साल जेल की सजा सुनाई और कहा कि सजा पूरी करने के लिए उन्हें
हिरासत में लिया जाए। अदालत ने बंगारू पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
उल्लेखनीय है कि उन्हें तीन साल की सजा होती तो अदालत से ही जमानत मिल जाती, लेकिन क्योंकि
उन्हें तीन साल से अधिक की सजा मिली है इसलिए उन्हें जमानत के लिए उच्च न्यायालय
के पास जाना पड़ेगा।
ज्ञात रहे कि एक स्टिंग
ऑपरेशन में उन्हें पार्टी मुख्यालय स्थित अपने कक्ष में धन लेते हुए कैमरे पर
पकड़ा गया था जिसके फौरन बाद उन्हें अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा। न्यायाधीश ने अपने निर्णय
में कहा कि मेरा यह मानना है कि अगर दोषी को भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 9 के
तहत चार साल के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना की सजा दी जाती है तो इससे
न्याय का हित पूरा होगा।
उन्होंने
कहा कि प्राय: कहा जाता है कि हमारी अपनी उदासीनता ही भ्रष्टाचार के लिए दोषी है। ‘सब
चलता है की मानसिकता’ के कारण आज यह स्थिति पहुंची है जहां बिना अवैध लेन देने के
कुछ भी आगे नहीं बढता। न्यायाधीश ने कहा, सही समय पर सही
चीजों को करवाने के लिए भी लोगों को धन देने के लिए मजबूर किया जाता हैं।
विद्वान न्यायाधीश ने कहा
कि समय आ गया है कि अपने देश
में ‘सब चलता है की मानसिकता’ को समाप्त किया जाये और को भ्रष्टाचार के दोषी
व्यक्तियों के साथ अदालतें कड़ाई के साथ पेश आएं। सत्र न्यायाधीश ने कहा कि इस
मानसिकता को खत्म करने का यह सही समय है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में अपराध का परिदृश्य
परेशान करने वाला है और आज की तथ्यात्मक वास्तविकताओं से मिथ्या सिद्ध हो रहा है
कि ‘अपराध कभी लाभकारी नहीं होता’।
इसने
मूल्य आधारित समाज बनाने के सर्वसाधारण और बौद्धिक समाज की आशयों पर तुषारपात कर
दिया है।
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