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‘बहादुर’ - आदित्य सेठ निर्देशित वृत्त चित्र
5/17/2012 1:19:47 PM
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- विशेष प्रतिनिधि

दित्य सेठ निर्देशित दृश्य मूवी के वृत्त चित्र बहादुरको सर्वोत्तम वृत्त चित्र का पुरस्कार मिला है। आदित्य सेठ एक क्रिएटिव निर्देशक है। वृत्त चित्र बहादुरउन नेपाली प्रवासियों के जीवन पर बनाया गया है जो रोजी रोटी की तलाश में अपने घर से सैंकड़ों कि. मी. दूर मुंबई मेंआते हैं और एक बार मुंबई आने के बाद घर से सालों Aditya-Dir.JPGसाल दूर हो जाते हैं। हजारों की संख्या में चौकी दार के रूप में काम करने वाले इन नेपाली कामगारों को लोग परंपरागत रूप से बहादुरके नाम से बुलाते हैं। चौकीदारी के अतिरिक्त अधिकतर नेपाली छोटे मोटे कामों में अपनी आजीविका तलाश करते हैं। अतः इनका जीवन बड़ा ही कठोर और गरीबी भरा होता है। घर से दूर, घर की याद सीने में छुपाए हुए इनमें से बहुत से बहादुरविभिन्न प्रकार के व्यसनों में लिप्त हो जाते हैं और फंस जाते हैं एडसनामक उस भयंकर रोग के मकड़जाल में जिसकी जकड़ में कोई एक बार आ जाए तो उसका निकलना लगभग असंभव ही होता है। समस्या के विभिन्न पहलूओं को को सामने लाने का अच्छा प्रयास किया है

और कारण व निराकरण पर भी रोशनी डालने की कोशिश की गई है। देखा जाए तो यह समस्या केवल नेपालियों में ही नहीं है बल्कि इसका सामना हर उस जाति या वर्ग को करना पड़ता है जिसके सदस्य काम की तलाश में अपने घर से सैंकड़ों, हजारों कि. मी. की दूरी पर जाते हैं।

फिल्म की फोटोग्राफी अच्छी है। लोकेशन शूटिंग भी काफी प्रभावशाली है। कसे हुए निर्देशन के कारण फिल्म, वृत्त चित्र होने के बावजूद भी दर्शकों को अंत तक बांधे रखने में सफल रहती है। इसके लिए आदित्य निस्संदेह बधाई के पात्र हैं।

bahadur_100dpi_rgb_2x3.jpg


*****

     Shubham-OK-529X180.JPG

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shayam bahadur rawal said :
बहुत - बहुत बधाई आपको ,साथ ही धन्यवाद भी. आपने नेपाली युवाओं का चित्रण और उनकी बाध्यताएं , समस्याओं की कथा को उजागर कर हम नेपालियों को जो गुण लगायें हैं उसके लिए फिर एक बार पुन: धन्यबाद / यह फिल्म मैंने देखि तो नहीं ,एक नेपाली होने के नाते ,साथ ही मैंने भी एक लम्बा कल खंड मुंबई में ही बिताकर आया हूँ/ मुंबई को काफी नजदीक से जिया हूँ. इसलिए मै महसूस कर सकता हूँ. मेरा अनुमान है आपने सिर्फ मुंबई के ही इत्र- तित्र भीखरे हुए नेपालियों की कथा पेश की होगी. अच्छा होता अगर आपने उन नेपालियों की गाँव की परिवेश को भी फिल्माया होता . -बहादुर -जुपु, अछाम. .
8/29/2012 2:39:35 AM

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