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याद किया संगीत के खोये सितारे को, बिखरे दान सिंह के जलवे - ईश मधु तलवार
6/23/2015 2:52:09 PM
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याद किया संगीत के खोये सितारे को, बिखरे दान सिंह के जलवे

- ईश मधु तलवार

 

क्या संगीत किसी को ज़िन्दगी दे सकता है? इस वाकये से तो ऐसा ही लगता है। यह किस्सा मॉरीशस से जुड़ा है। जयपुर के हिंदी विद्वान और गीतकार हरिराम आचार्य जब विश्व हिंदी सम्मलेन में भाग लेने मॉरीशस गए तो वहां घूमते हुए उन्हें एक मकान से गाने की आवाज़ आई। गाने के बोल थे ‘'गम-ए-दिल किस से कहूँ, कोई भी ग़मख़ार नहीं, हैं सभी गैर यहां कौन सुने दिल की जलन’ फिल्म ‘भूल न जाना’ में दान सिंह के संगीत से सजा यह गीत जयपुर के हरिराम आचार्य ने ही लिखा है। अपने लिखे गीत को पराई धरती पर सुन कर उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने उस मकान के दरवाजे पर जाकर दस्तक दे दी। अंदर से एक बूढा आदमी निकला। घर के अंदर गए तो उन्होंने देखा कि वह बूढा आदमी भूल न जाना की एलपी सुन रहा था। उसने बताया – ‘न मेरे बच्चे मेरे पास हैं, न अब मेरी पत्नी ही है। जब भी मरने की इच्छा होती है और डिप्रेशन में चला जाता हूँ तो यह गाने सुनता हूँ। इनसे बड़ा सुकून मिलता है।

यह आश्चर्य नहीं तो क्या कि एक बूढा आदमी अकेला बंद कमरे में दान सिंह के संगीतबद्ध किये गीत को सुन कर जीने की कोशिश करता है। यह दान सिंह के संगीत का ही जादू था। बॉलीवुड के महान संगीतकार दान सिंह की 18 जून को पांचवीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में रविवार की शाम बीबीसी के संगीत समीक्षक पवन झा ने दान सिंह पर बनायी अपनी एक खूबसूरत लघु फिल्म दिखाते हुए हरिराम आचार्य जी के हवाले से यह किस्सा बताया।

 

अलग हट कर संगीत

उस दिन जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में सचमुच एक सुरीली शाम उतरी। यह विडम्बना ही है कि लोग दान सिंह के संगीतबद्ध गाने आज भी गुनगुना लेते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि वो जिस संगीत को सुन रहे हैं वो दान सिंह का है। उदाहरण के लिए उनके दो मशहूर गीतों को ही लें – ‘वो तेरे प्यार का गम, इक बहाना था सनम। और ‘ज़िक्र होता है जब क़यामत का, तेरे जलवों की बात होती है। शशि कपूर - शर्मीला टैगोर अभिनीत माय लव के इन गीतों में ज़िक्र होता है जब क़यामत का जस्टिस प्रेम चंद शर्मा ने सुनाया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे संजय पारीक ने दर्द भरी आवाज़ में वो तेरे प्यार का गम ......  सुनाया तो श्रोताओं से खचाखच भरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। तालियों और वाह-वाह का यह सिलसिला उस समय और तेज हुआ जब पवन झा ने दान सिंह पर बनाई अपनी दृश्य-श्रव्य आधारित फिल्म पुकारो मुझे नाम लेकर पुकारो  को परदे पर उतारा। इसमें विख्यात गीतकार गुलज़ार ने दान सिंह और उनके संगीत को लेकर लम्बी टिप्पणी की है। उन्होंने ‘भूल न जाना  के लिए लिखे अपने गीत – पुकारो मुझे नाम लेकर पुकारो, मुझे तुमसे अपनी खबर मिल रही है  के बारे में बताया कि दान सिंह जी का संगीत उस दौर के बाकी अन्य संगीतकारों से अलग हट कर था, इसलिए यह गाना भी संगीत की दृष्टि से एक अलग ढंग का बन पड़ा है, जो मुकेश के गाये सर्वश्रेष्ठ गानों में शुमार होता है। उल्लेखनीय है कि दान सिंह जी की फिल्म ‘भूल न जाना  का प्रदर्हन नहीं हो सका था

 

जब रो पड़ीं गीता दत्त

पवन झा ने हरी राम आचार्य के एक और गीत को गीता दत्त की आवाज़ में सुनवाया – मेरे हमनशीं, मेरे हमनवां, मेरे पास आ, मुझे थाम ले।  दान सिंह के संगीत की कशिश और लफ़्ज़ों का जादू था कि रिकॉर्डिंग के समय गीता दत्त रो पड़ीं और रिकॉर्डिंग एक बार स्थगित कर देनी पड़ी।

 Daan SinghProg.jpg

 

चाय पी लूँगा

पवन झा ने दान सिंह की आवाज के साथ एक किस्सा सुनाया। दान सिंह मुम्बई से निराश होकर जिस रोज जयपुर लौट रहे थे और शाम की ट्रेन में उनका टिकट हो चुका था, उसी रोज किसी ने बताया कि फिल्म डिवीजन के भास्कर राव राजस्थान की पृष्ठ भूमि पर एक फिल्म ‘रेत की गंगा बना रहे हैं और उन्हें संगीतकार की जरूरत है। दान सिंह उनके पास जब पहुंचे तो दफ्तर बंद होने वाले थे। भास्कर राव ने कहा की अब तो उन्हें सुना भी नहीं जा सकता, क्यों कि सभी म्यूजीशियन्स जा चुके हैं। दान सिंह ने कहा शाम को मेरा जयपुर का टिकट है, मैं बिना साजों के ही आपको सुना दूंगा। दान सिंह ने टेबल पर हाथ से ताल देते हुए उन्हें सुनाना शुरू किया। राव ने कहा- लॉरी सुनाओ, उन्होंने सुना दी। फिर कहा पृथ्वी को लेकर कोई गीत। वह भी सुना दिया। आठ-दस चीजें सुनने के बाद राव ने कहा - आप क्या लेंगे?’

दान सिंह ने कहा- चाय ले लूंगा।’

इस पर राव हँसे और कहा – ‘मैं पैसे के लिए पूछ रहा था।’

दान सिंह की आँखों में आंसू आ गये। राव के पूछने पर बताया – ‘मुझे मुम्बई में पैसा देखे एक अरसा हो चुका है।’

 

चोरी हो गया संगीत !

दान सिंह के संगीत चोरी होने के कई दिलचस्प किस्से पवन झ ने अपनी दृश्य-श्रव्य आधारित फिल्म के माध्यम से बताए। एक बार जब गुलज़ार के लिखे गीत – ‘पुकारो मुझे नाम ले कर पुकारो की रिकॉर्डिंग के लिए मुकेश आये तो उन्होंने बताया की इस धुन पर तो आज ही एक गाने की रिकॉर्डिंग हो चुकी है। दान सिंह ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है?’

इस पर मुकेश ने कहा – ‘दान सिंह जी, यह बंबई है। आप शाम को तरल-गरल पार्टियों में लोगों को अपना संगीत सुनाएंगे तो यही होगा।’

पता चला कि उनका यह संगीत फिल्म खानदान  के गीत तुम्हीं मेरे मंदिर तुम्हीं मेरी पूजा ... ’  में जा चुका था, लेकिन दान सिंह ने कहा - कोई बात नहीं, मैं एक घंटे में दूसरी धुन बना देता हूँ, और आज जिस धुन पर यह गीत बजता है, वह पहली से बेहतर धुन है।

 

इन्दीवर ने तोड़ दिया ह्रदय

पवन झाने बताया कि पूरब पश्चिमके गीत ‘कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे, तडफता हुआ जब तुम्हें छोड़ दे  मेरा दर खुला है, खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए’  की धुन दान सिंह जी ने बनायी थी, जो इन्दीवर ने एक कार के बदले कल्याणजी आनंदजी को दे दी और एक बार आकाशवाणी पर इन्दीवर इस बात को स्वीकार भी कर चुके हैं। यही नहीं, इन्दीवर के गीत – चन्दन सा बदन, चंचल चितवन ...’ की धुन भी दान सिंह ने ही बनायी है। इन्दीवर ने यह गीत पहले दान सिंह के संगीत से सजी फिल्म भूल न जानाके लिए लिखा था। जब यह फिल्म रिलीज नहीं हुई तो उन्होंने गीत वापस लेकर कल्याणजी आनंदजी को देने की इज़ाज़त ली, लेकिन संगीत भी साथ में दे दिया।

 

गुज़र गए जो हसीं ज़माने

पवन झा ने अपनी फिल्म में कई ऐसे गीत बजा कर दिखाए, जिनकी धुनें दान सिंह पहले ही बना चुके हैं। इनमें एक गीत तो लफ़्ज़ों में थोड़ी हेराफेरी करके दान सिंह के संगीत को ज्यों का त्यों लक्ष्मीकांत-प्यारे लाल ने उठा लिया। फिल्म में पहले माई लवका दान सिंह वाला गीत सुनाया गया – मेरे ख्यालों के रहगुज़र से वो देखिये वो गुज़र रहे है न फिर फिल्म ‘यह इश्क़ नहीं आसाँ का लक्ष्मीकांत-प्यारे लाल वालाIshMadhuTalwar-.jpg गीत सुनाया – ‘गुज़र गए जो हसीं ज़माने ख़याल में वो उभर रहे हैं’ धुन वही है। बहुत काम लोग जानते है कि ‘माई लव’ फिल्म में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दान सिंह के सहायक के रूप में काम किया है। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ पत्रकार और दान सिंह के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘वो तेरे प्यार का गम के लेखक ईश मधु तलवार ने बताया कि माई लव फिल्म में दान सिंह के निर्देशन में लक्ष्मीकांत ने मेंडोलिन, प्यारेलाल ने वॉयलिन, पंडित शिव कुमार ने संतूर और हरिप्रसाद चौरसिया ने बांसुरी बजाई थी। मोहम्मद रफ़ी, मन्ना डे, मुकेश, आशा भोंसले, गीता दत्त, सुमन कल्याणपुर आदि ने दान सिंह के सुरों से सजे गीतों को अपनी आवाज़ दी थी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता की मशहूर शायर लोकेश कुमार सिंह साहिल ने।

अंत में कवि ओमेन्द्र ने आगंतुकों को तह-ए-दिल से धन्यवाद किया।

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Remembered forgotton music star, Daan Singh – Ish Madhu Talwar

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Vijay Swami said :
दिल को बहुत सुकून मिला स्वर्गीय श्री दान सिंग जी को याद करके. उनके दिए संगीत और उनकी स्वयं की आवाज में वार्तालाप को बहुत ही खूबसूरती के साथ श्री पवन झा जी ने तैयार किया हुआ था जिसे देख कर बहुत सुखद लगा और गौरवान्वित महसूस किया की हम भी उसी शहर के वासी हैं जहाँ दान सिंग जी रहा करते थे.शत शत नमन एक वास्तविक कलाकार को. विजय स्वामी #08386836289 जयपुर
6/24/2015 10:31:19 AM

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