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वेद प्रकाश काम्बोज के उपन्यासों का विमोचन
1/16/2019 5:56:31 PM
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वेद प्रकाश काम्बोज के उपन्यासों का विमोचन

- उमाकांत पांडे

साठ वर्षों से अपने जासूसी उपन्यासों से पाठकों के मन पर राज करने वाले वरिष्ठ लेखक वेद प्रकाश काम्बोज के पूर्व प्रकाशित ओर बहुचर्चित दो उपन्यासों ‘दांव खेल’ तथा ‘पासे पलट गए’ का नई सज धज के साथ ‘गुल्लीबाबा पब्लिशिंग हाउस’ द्वारा प्रकाशित किया गया। इस संयुक्त पुस्तक का विमोचन 6 जनवरी को प्रगति मैदान, दिल्ली में आयोजित ‘विश्व पुस्तक मेला - 2019’ में किया गया। विमोचन के अवसर पर उपन्यासकर परशुराम शर्मा, आबिद रिजवी, धरम बारिया (धरम-राकेश), योगेश मित्तल, वीरेंद्र शर्मा (सुपुत्र स्व० ओम प्रकाश शर्मा), रमाकांत मिश्रा के साथ-साथ सैकड़ों प्रशंसक और युवा लेखक एवं युवा पाठक भी उपस्थित थे।

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उपन्यासकार आबिद रिजवी ने नम आँखों के साथ कहा “ऐसा कार्यक्रम पहले कभी नहीं हुआ जिनमें इतने नामी लेखकों ने एक साथ भाग लिया हो! यह कार्यक्रम मुझे बीते दिनों की याद दिला रहा है।”

उपन्यासकार परशुराम शर्मा ने कहा जो लेखक मुझे पसंद आये और जिनको मैं पढ़ता रहा हूं उनमें वेद प्रकाश काम्बोज मुख्य रहे हैं जिन्हें पढ़-पढ़ कर कई लेखकों ने नन केवल अपनी दुकानदारी चलाई बल्कि नाम भी कमाया।

पाठकों की मांग पर हुआ पुनर्प्रकाशन

आधी शताब्दी पूर्व के बीते दौर में जब मनोरंजन के नाम पर सिर्फ रेडियो और सिनेमा ही हुआ करता था तब से लेकर 90 के दशक तक वेद प्रकाश काम्बोज के उपन्यासों को खूब धड़ल्ले के साथ पढ़ा जाता था। इन से पहले स्वर्गीय इब्ने सफी और स्वर्गीय ओम प्रकाश शर्मा जाने-पहचाने लेखक थे।

काम्बोज के उपन्यासों में सीधी और सरल भाषा में ऐसे-ऐसे रोमांचकारी और मनोरंजक कथानक होते थे। इनका कथानक आज के दौर की किसी सुपरहिट फिल्म की पटकथा की तरह लगता था। 400 के करीब उपन्यास लिखने वाले काम्बोज ने जासूसी पात्रों विजय रघुनाथ की जो कल्पना की उस लेकर कई अन्य लेखकों ने अपना नाम कमाया। काम्बोज के नाम से उस दौर में विजय रघुनाथ सीरीज के अनेक जाली उपन्यास भी मार्केट में आए। चूँकि काम्बोज के पाठक आज भी उनके पुराने उपन्यासों का मुंह मांगी कीमत ऊपर खरीदते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उनके कई पाठकों जिनमें बलविंदर सिंह जी प्रमुख है ने उनके उपन्यासों को फिर से प्रकाशित करवाने के लिए अनुरोध किया जिसके फलस्वरूप ‘गुल्लीबाबा पब्लिशिंग हाउस’ के दिनेश वर्मा ने वेद प्रकाश काम्बोज के दो बेहद रोमांचकारी और मनोरंजक उपन्यासों को प्रकाशित करने का निर्णय किया।

वेद प्रकाश काम्बोज

वेद प्रकाश काम्बोज का जन्म 1 दिसंबर 1939 को दिल्ली के शाहदरा में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिगंबर जैन मंदिर स्कूल शाहदरा में। स्कूल के दिनों में एम एल पांडेय और इब्ने सफी के जैसे प्रसिद्ध लेखकों से प्रभावित होकर अपना प्रथम उपन्यास ‘कंगूरा’ लिखा जो कि 1958 में प्रकाशित हुआ और बहुत प्रसिद्ध हुआ। उसी दौरान उनकी मुलाकात उस युग के जनप्रिय ओम प्रकाश शर्मा से हुई, उनके माध्यम से जवाहर चौधरी और बृजमोहन पांडे से परिचय हुआ। इन तीनों के सानिध्य में काम्बोज जी को अपनी प्रतिभा को निखारने का जो अवसर प्राप्त हुआ उसका आभार वह आज तक मानते हैं।

राम पुजारी के उपन्यासों का भी हुआ विमोचन

युवा लेखक राम पुजारी के उपन्यासों ‘अधूरा इंसाफ... एक और दामिनी’ तथा लव जिहाद ... एक चिड़िया का विमोचन वेद प्रकाश काम्बोज के हाथों हुआ। काम्बोज जी ने उम्मीद व्यक्त की कि समय के साथ राम पुजारी के कलम की धार और बढ़ेगी तथा अन्य सामाजिक समस्याओं को और भी शिद्दत से उठाएंगे।

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राम पुजारी का पहला उपन्यास अधूरा इंसाफ... एक और दामिनीनिर्भया मामले पर आधारित है जबकि दूसरा उपन्यास लव जिहाद... एक चिड़ियाहै जो सच्चे प्यार करने वालों के प्रति समाज की धर्म-राजनीति के चश्मे से देखने वाली कट्टरवादी सोच पर एक प्रहार है। दोनों ही उपन्यासों में समाज में स्त्रियों की दशा और समाज की दोहरी सोच पर सवाल उठाये गए हैं। विमोचन में अनेक जाने-माने वरिष्ठ लेखक, प्रकाशक व पाठक उपस्थित थे।

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- उमाकांत पांडे
  (लखनऊ)

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 #Launching_of_Ved_Prakash_Kamboj’s_Novels

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Rahul said :
This is a begging for Ram sir I known he is know about our system....this book is disclose our famdamental rightes....all the best..Ram sir
1/18/2019 11:48:51 AM
Deepak Sharma said :
वेदप्रकाश काम्बोज जी और राम पुजारी जी को बहुत बहुत बधाई।
1/17/2019 9:59:06 AM
Amardeep said :
What a genius writer. Hats off to Ved Prakash Kamboj sir. - Amardeep
1/18/2019 10:41:26 AM
Ranjeet singh urf Rsbsingh said :
वेदप्रकाश कम्बोज जी को हार्दिक शुभकामनाएं मंगल कामनाये भगवान उन्हें दीर्घ आयु प्रदान करे ।
1/19/2019 3:58:13 AM
वीरेन्द्र शर्मा said :
जय हो।
1/17/2019 8:57:29 AM
Gurpreet Singh said :
विश्व पुस्तक मेले के दौरान विमोचित राम पुजारी जी और वेदप्रकाश कांबोज जी के दोनों उपन्यास बहुत अच्छे हैं। कांबोज का उपन्यास जहाँ जासूसी है वहीं राम पुजारी सामाजिक विषय पर बहुत अच्छा लिखते हैं। दोनों लेखकों को हार्दिक बधाई। www.sahityadesh.blogspot.in
1/18/2019 10:36:44 AM
Abid Rizvi Lekak said :
एक अभूतपूर्व कार्यक्रम, जो गुल्लीबाबा प्रकाशन संस्थान के सौजन्य से ६जनवरी, २०१९ ई.को पुस्तक मेला दिल्ली में आयोजित हुआ । मुझे गर्व है और आनन्दित हूँ कि साठ साल पूर्व जिन्हें मन ही मन गुरु मानकर जासूसी नॉवल लेखन कार्य शुरू किया था, उन गुरु वेदप्रकाश काम्बोज के पुनर्प्रकाशित उपन्यास के लांचिग अवसर पर प्रिय मेशु काम्बोज , नवोदित और मेरे विशेष पसन्दीदा लेखक रामपुजारी ने मुझे विशेष रूप से आने का आग्रह किया था । मैं शामिल हुआ, और जब लांचिग समय आया तो नए पुराने लेखकों और पाठकों की जो मौजूदगी बढ़ती गई, वह अचम्भित कर देने वाली साबित हुई । वेद प्रकाश काम्बोज के पाठक दूर-दूर से सफ़र तय करके पहुँचे थे । मेरे सखा लेखक साथी परशुराम शर्मा का प्रिय लेखक इकराम फ़रीदी का, रमाकांत मिश्र (वरिष्ठ लेखक )का, पहुचँना सबसे चौंकाने वाला था । रामपुजारी , तो थे ही योगेश मित्तल, धरम वारिया जैसे लेखक गण ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर मेरी आँखों को नम करने को मजबूर कर दिया ; क्योंकि इनसे मिलन की आस छोड़ सा चुका था । पाठकों की उपस्थिति लिखने लगूँ तो सबका नाम भी न लिख सकूँगा , हाज़िरी रजिस्टर से भी नाम पूरे न होंगे, क्योंकि ज़रूरी नहीं कि स्नेही आगन्तुकों में सब को हस्ताक्षर करने का अवसर मिला भी हो । आभार इस सुअवसर का, प्रणाम गुरुवर वेद प्रकाश काम्बोज को ! ऐसा सुअवसर देबारा मिले ...यह ख़्वाहिश अभी बाक़ी है ! आशा है हम गुल्ली बाबा के स्टॉल पर आगामी साल इससे ज़्यादह उत्साह से मिलेंगे ।
1/22/2019 7:06:26 AM
Vipin Kumar said :
वेदप्रकाश काम्बोज जी कोटिश कोटिश बधाई और साहित्य के क्षितिज पर आपका सिताा चमता रहे।
1/17/2019 7:58:10 AM

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