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जीएमआर एयरपोर्ट मामला : राष्ट्रीय हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती
12/6/2012 9:41:30 PM
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- विशेष प्रतिनिधि

सिंगापुर उच्च न्यायालय ने संकटग्रस्त भारतीय कंपनी जीएमआर एयरपोर्ट को झटका देते हुए निर्णय दिया है कि मालदीव सरकार निजी कंपनी से माले हवाई अड्डा वापस ले सकती है।

परियोजना के अनुबंध के अनुसार दोनों पक्षों के बीच मतभेद की स्थिति में सिंगापुर या फिर ब्रिटेन का कानून लागू होगा।

पिछले दिनों भारतीय कंपनी जीएमआर एयरपोर्ट के 50 करोड़ डॉलर के अनुबंध को रद्द कर दिया। जीएमआर इस परियोजना पर 25 करोड़ डॉलर खर्च कर चुकी है। उल्लेखनीय है कि ‘जीएमआर’ और ‘मलेशिया एयरपोर्ट’ ने संयुक्त रूप से ये अनुबंध 2010 में हासिल किया था। इसके अंतर्गत इन कंपनियों को अगले 25 वर्षों तक माले एयरपोर्ट का संचालन करना था। इस अनुबंध में जीएमआर एयरपोर्ट का हिस्सा 77 प्रतिशत है जबकि बाकी का 23 प्रतिशत हिस्सा मलेशिया एयरपोर्ट के पास है।

लेकिन पिछले सप्ताह ही मालदीव के अधिकारियों ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के कार्यकाल में हस्ताक्षरित इस अनुबंध को अचानक निलंबित कर दिया।

परियोजना रद्द होने के बाद जीएमआर एयरपोर्ट ने सिंगापुर उच्च न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया, जिसने अनुबंध को रद्द किए जाने पर स्थगन आदेश जारी किया था। यद्यपि मालदीव सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि वह नोटिस की अवधि खत्म होने के एक दिन बाद शनिवार को जीएमआर एयरपोर्ट से हवाईअड्डे का अधिग्रहण करेगी।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद के प्रेस सचिव मसूद इमाद ने माले में कहा ‘‘सिंगापुर की अपीलीय अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि मालदीव सरकार को हवाईअड्डा वापस लेने का अधिकार है।’’

उन्होंने कहा ‘‘मालदीव तय समय के अनुसार अधिग्रहण करेगा।’’

ज्ञात हो कि मालदीव सरकार ने 27 नवंबर को अप्रत्याशित कदम उठाते हुए जीएमआर एयरपोर्ट को मिला तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के कार्यकाल के दौरान 50 करोड़ डॉलर का अनुबंध रद्द कर दिया था। यह परियोजना माले हवाईअड्डे के उन्नयन और नए टर्मिनल के निर्माण से जुड़ी है।

सरकार ने कहा था कि वह इस अनुबंध को इसलिए रद्द कर रही है कि इस पर संदेहास्पद स्थिति में हस्ताक्षर हुए और यह अवैध है लेकिन कंपनी ने इस आरोप का कड़ा विरोध किया।

जीएमआर एयरपोर्ट मामले से अचम्भित भारत सरकार ने मालदीव से कहा कि इस पहल के द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर परिणाम होंगे। कानून का पालन न होने की स्थिति में सहायता कार्यक्रम को धीमा करने समेत कई विकल्पों पर विचार कर किया जा रहा है।

भारत ने यद्यपि यह स्वीकार किया कि मालदीव सरकार का माले हवाईअड्डा निर्माण से जुड़ा जीएमआर एयरपोर्ट का अनुबंध रद्द करने का निर्णय घरेलू मामला है तथापि वह इस बात से चिंतित है कि इस बहाने कहीं भारत विरोधी रुख को तो हवा नहीं दी जा रही है?

विचारणीय है कि इस हवाईअड्डा अनुबंध को रद्द करने के मामले में कुछ वाह्य तत्वों की भूमिका की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। इस संबंध में जीएमआर एयरपोर्ट के सीएफओ सिद्धार्थ कपूर ने कहा कि इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि ठेका छिनने के पीछे किसी दूसरे देश का हाथ है। अभी तक स्पष्ट रूप से चीन के इसमें शामिल होने के संबंध में संदेह का कोई साक्ष्य नहीं मिला है परंतु उसे पूर्णतया नाकारा भी नहीं जा सकता।

 

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अरविंद कुमार said :
भारत सरकार को इस पर कड़ा विरोध प्रकट करना चाहिए. - अरविंद कुमार
12/6/2012 9:46:30 PM

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