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हमें साहित्य के वातावरण को अपने भीतर से बदलना होगा – चित्रा मुद्गल
11/25/2014 12:58:38 PM
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- आरती रानी प्रजापति

20वें अंतरराष्ट्रीय इन्दु शर्मा कथा सम्मान के दौरान वरिष्ठ कथाकार चित्रा मुद्गल ने आई.सी.सी.आर. के आज़ाद भवन में सुन्दर चन्द ठाकुर को उनके उपन्यास पत्थर पर दूब के लिये सम्मानित करते हुए कहा, हमें साहित्य के वातावरण को अपने भीतर से बदलना होगा। उन्होंने आगे कहा कि इंदु शर्मा कथा सम्मान के अलावा शायद ही ऐसा कोई सम्मान होगा जो बिना किसी राजनीति के पुरस्कार देता हो। साहित्य में ये यात्रा जारी रहे यही मेरी कामना है। यह सम्मान मुझे जब मिला जो मेरी जिन्दगी का टर्निग पॉइंट था। जिस भी रचना को ये सम्मान मिला है वह अपने आप में हिन्दी साहित्य के विषयों को विस्तार देने वाली साबित हुई हैं। युवाओं से शुरू होता हुआ ये सम्मान आज फिर युवाओं पर आ गया है।

सुन्दर चन्द ठाकुर के उपन्यास पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा यह उपन्यास अपने को गौर से पढ़ने की मांग करता है। आज तक बहुत कम रचनाएँ फौजी जीवन पर लिखी गयी हैं। फौजी के मानासिक, पारिवारिक द्वंद को यह उपन्यास बताता है।

कार्यक्रम की शुरूआत में संस्था के संस्थापक महासचिव एवं कथाकार तेजेन्द्र शर्मा ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी देने के साथ साथ इस वर्ष शार्टलिस्ट किये गये छः उपन्यासों के बारे में विस्तार से बताया। उनका कहना था कि ‘इन्दु शर्मा कथा सम्मान’ कभी भी किसी कमज़ोर रचना को नहीं दिया गया है। यहां रचना महत्वपूर्ण होती है ना कि लेखक का कद।

असगर वजाहत ने कहा कि इस उपन्यास में काफी चीजें आ जाती हैं। सर्वप्रथम सुन्दर चन्द ठाकुर को बधाई, दूसरी तेजेंद्र शर्मा को बधाई जो पिछले कई सालों से इस सम्मान के माध्यम से साहित्य के लिए इतना बड़ा काम कर रहे हैं। ये हिन्दी को एक अच्छा स्थान दिलवाने में मददगार हैं। मुझे आशा है कि ये कदम आगे भी चलता रहेगा।

वरिष्ठ साहित्यकार प्रताप सहगल कहते हैं कि यह एक कवि का ही उपन्यास है। जब कवि गद्य लिखता है तो कुछ बुनियादी फ़र्क आता है। ठाकुर कविता के बिम्बवाद को उपन्यास में लाये हैं। यहाँ अनावश्यक विस्तार से बचा गया है। इस उपन्यास में जीवन है। सेना का अनुशासन क्या हमारी संवेदनाओं को ख़त्म कर देता है? इस प्रश्न को उपन्यास सामने रखता है। जीवन के अनुभव से जो चीजें उभर कर आती है उन्हें सृजनात्मक रूप से पेश करना रचनाकार की उपलब्धि है।

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कलकत्ता से विशेष तौर पर पधारे युवा उपन्यासकार कवि विमलेश त्रिपाठी का कहना था किस्सागोई और कथा कहने की क्षमता से कृति का निर्माण होता है। ठाकुर में यह विशेषता है। वह कहते हैं की सेना और उसके अंतर्विरोधों पर मेरी नज़र में यह पहला उपन्यास है। सेना के बारे में हम लोगों की जानकारी अच्छी ही होती है।

सम्मान के बाद लेखक ने अपने भाव सबके सामने रखे। उनका मानना है कि अच्छा लिखने की कसौटी है कि जब आप अपना लिखा हुआ पढ़े तो आपके रोंगटे खड़े हो जाए। इस उपन्यास की पठनीयता की विशेषता की हर जगह तारीफ सुनने को मिली। साहित्यकार बनने की चाहत ने मेरी फौज से नौकरी छुड़वा दी। इस उपन्यास में मेरा निजी जीवन भी आया है।

ब्रिटेन की लेबर पार्टी के सांसद विरेन्द्र शर्मा ने कथा यूके एवं सुन्दर चन्द ठाकुर को बधाई देते हुए कहा कि हम यह कार्यक्रम ब्रिटेन के हाउस ऑफ़ कॉमन्स में हमेशा करते आ रहे हैं। यहां बीसवां प्रोग्राम भारत में करते हुए एक विशेष अनुभूति हो रही है। उन्होंने विशेष तौर से काउंसलर ज़किया ज़ुबैरी और तेजेन्द्र शर्मा को ब्रिटेन में हिन्दी की गतिविधियों के लिये साधुवाद कहा।

मुंबई से पधारीं मधु अरोड़ा ने संस्था की मुंबई गतिविधियों का परिचय दिया। प्रो. सत्यकेतु सांकृत ने मानपत्र पढ़ा, डॉ अजय नावरिया ने कुशल संचालन किया। धन्यवाद ज्ञापन में तेजेन्द्र शर्मा ने विशेष रूप से आई.सी.सी.आर., जय वर्मा, ज़किया ज़ुबैरी, मधु अरोड़ा एवं वन्दना पुष्पेन्द्र का आर्थिस सहयोग के लिये धन्यवाद किया।

कार्यक्रम में विशेष रूप से भाग लेने पूर्व इन्दु शर्मा कथा सम्मान विजेता इस कार्यक्रम में शामिल हुए – जिनमें महुआ माजी (रांची), एस.आर. हरनोट (शिमला), विकास कुमार झा (पटना), देवेन्द्र (लखनऊ), प्रदीप सौरभ (दिल्ली), प्रमुख थे। विदेश से पधारे प्रवासी साहित्यकारों ने इस कार्यक्रम में शिरक़त करके इसे सही अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने में भूनिका निभाई। इनमें प्रमुख रहीं सुधा ओम ढींगरा (अमरीका), दिव्या माथुर, नीना पॉल, अरुण सभरवाल, ज़किया ज़ुबैरी (सभी ब्रिटेन)। इनके अतिरिक्त समारोह में उपस्थिति दर्ज करने वालों में लीलाधर मण्डलोई, विभूति नारायण राय, मंगलेश डबराल. दिविक रमेश, अशोक चक्रधर, विमल कुमार, वेद प्रकाश वटुक, सुमन केशरी, विवेक मिश्र, सुशील सिद्धार्थ, बृजेन्द्र त्रिपाठी, विनोद भारद्वाज, माया मृग, अर्चना वर्मा, प्रेम सहजवाला, रूपा सिंह, अमृता बेरा, अनिल जोशी, सुनीति शर्मा, भरत तिवारी, सोनाली सिंह, अजन्ता शर्मा, मीनाक्षी जिजीविषा, राजेन्द्र प्रताप सिंह, गीताश्री, वन्दना पुष्पेन्द्र, आकांक्षा पारे, वेद उनियाल, मंजरी श्रीवास्तव, वन्दना गुप्ता, अनन्त अजय, इरफ़ान, राकेश पाण्डे, अर्चना चतुर्वेदी, शाहीना ख़ान, मनोज भावुक, राजीव तनेजा, हरनेक गिल, संतोष त्रिवेदी, मनीषा भल्ला एवं डॉ. रश्मि आदि शामिल थे।

 

आरती रानी प्रजापति

 

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