मिले प्यार में मुझको
मौसम सभी थे
- श्याम सखा ‘श्याम’
मुहब्बत मुझे हर जगह हां मिली थी
यहां भी मिली है वहां भी मिली थी
न सुनना ही आया न कहना ही आया
मुझे दिल मिला था जुबां भी मिली थी
मिले प्यार में मुझको मौसम सभी थे
फ़िजां भी मिली थी खिजां भी मिली थी
रहे-इश्क जब था पकड़कर चला मैं
हुई मुश्किलें मुझको आसां मिली थी
गिला जिन्दगी से करूं `श्याम' मैं क्या
मुझे मौत बन मेहरबां भी मिली थी
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