- अनिल पुसदकर
अब देश के नये
स्वयंभू ठेकेदार टीवी वालों को होश आ रहा है। अब उन्हे लग रहा है कि बाबा लोग
फर्ज़ी है
अब देश के नये स्वयंभू
ठेकेदारों, टीवी वालों को होश आ रहा है। उन्हे लग रहा है कि बाबा लोग फर्ज़ी है। अब
वे इन बाबाओं के फर्ज़ीवाडे पर महाबहस करने जा रहे हैं। और अभी तक़ जो उसी फर्जी बाबा
का आधा-आधा घंटे का कार्यक्रम दिखाते रहे? उस पर कौन बहस करेगा? लोगो को गुमराह
करने वाले, वे जाल बिछाने वाले कौन लोग थे? क्या 24 घंटे के न्यूज़
चैनल पर बाबाओं के कार्यक्रम दिखाना खुद एक बडा फर्ज़ीवाडा नहीं है? जरा तो शर्म करो बहस करने वालो?
ऎसे में कौन
साला मरना चाहेगा देश के लिये? एक नहीं 55 पुलिस वालों के हत्यारे को ओडिसा सरकार ने
रिहा कर दिया एक इतालवी की रिहाई के लिये!
ऎसे में कौन साला मरना
चाहेगा देश के लिये? एक नहीं 55 पुलिस वालों के हत्यारे को ओडिसा सरकार ने रिहा कर
दिया, एक इतालवी की रिहाई के लिये। उसके साथ और कई दुर्दांत और बर्बर ह्त्यारे भी
रिहा हो गये। क्या यही देश का कानून है? क्या इसिलिये अपनी जान हथेली पर लेकर लड रहे है नक्सलियों से पुलिस वाले? क्या इसिलिये जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा अपनी जान को
दांव पर लगा कर करते है, सुरक्षा कर्मी कि उनके ह्त्यारे यूंही रिहा कर दिए जाएं? क्या इसी तरह दबाव में काम करती रहेंगी सरकारे?
फिर वो इतालवी नागरिक है
कौन? किसकी सलाह से जंगम में गया
था? आखिर वो उस नक्सल प्रभावित
इलाके में ढूंढ क्या रहा था? उसे भारत में
पर्यटन के लिये सिर्फ वही इलाका मिला? है क्या वहां देखने लायक? बहुत से सवाल है जो दिमाग खराब कर रहे है। बस मां बहन
की गालिया भर बस नहीं लिख पा रहा हूं। मैं मुम्बई-दिल्ली का कोई फेमस सेलेब्रेटी
होता तो वह भी कर देता। आखिर नक्सलियों से बातचीत में इस तरह की नपुंसकता क्यों? वे हमारे लोगो को बिना वजह,
बिना
हिचक मारे जा रहे है और हमें बार बार ये कहना पडता है कि इस समस्या का जवाब गोली
से नहीं दिया जा सकता। आखिर क्यो?
कल उन्होंने
बस्तर में बीमार बच्चों को इलाज के लिये शहर ला रही एंबुलैंस तक पर फायरिंग कर दी।
आधा दर्जन बीमार बच्चों और नर्स की तकदीर अच्छी थी जो बाल-बाल बचे। आखिर एंबुलैंस तक पर फायरिंग करने वाले बेरहम हत्यारों पर रहम
दिखा कर क्या जताना चाह्ती है सरकार?
कल को इनका कोई रिश्तेदार
बंधक हो जाएगा तो शायद ये उसकी रिहाई के बदले पूरे देश को ही बेच देंगे, वह भी हम आम जनता समेत। थू है, ऎसी घटिया राजनीति पर।
थू है, तुष्टिकरण की नीति पर। थू है ऎसे सड़े हुए सिस्टम पर। यही हाल रहा तो फिर
कोई शहीद नहीं होना चाहेगा सड़े-गले नेताओं की जान की सुरक्षा के लिये।
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