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पुस्तक चर्चा : ‘लव जिहाद ...एक चिड़िया’ - राम पुजारी
6/5/2019 6:55:58 PM
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लव जिहाद...एक चिड़िया- राम पुजारी

- गुरप्रीत सिंह

राम पुजारी लिखित 'लव जिहाद ...एक चिड़िया' उपन्यास मूलत एक प्रेम कथा है,वह प्रेम कथा जो समाज, धर्म, राजनीति के कई पहलुओं को उजागर करती है। उपन्यास प्रेम को आधार बना कर लिखा गया है। एक हिंदू लड़की और एक मुस्लिम लड़के की प्रेम कथा है। दोनों कालेज में मिलते हैं, साहिल का कालेज में यह अंतिम साल था और सोनिया का पहला साल था। फिर धीरे-धीरे दोनों में प्रेम प‌नपता है। साहिल और सोनिया दोनों एक ही कश्ती में सवार थे - प्रेम की कश्ती में। (पृष्ठ-35)

कवि बोधा ने कहा है -"यह प्रेम को पंथ कराल महां, तरवारि की धार पर धावनो है।" यह प्रेम का रास्ता बहुत विकट है, यह तो तलवार की धार पर चलने जैसा होता है पर प्रेमी Cover-ok.jpgफिर भी चलते हैं। साहिल और सोनिया भी इस राह पर चलते हैं। दोनों ही आने वाले भविष्य से बेखबर, ख्वाबों की दुनियां में प्रेम की उड़ान भर रहे थे। लेकिन यह उड़ान सोनिया के परिवार को रास नहीं आयी। दूसरी ओर साहिल का तो किस्सा ही कुछ और था।

जो प्रेम की राह पर चलते हैं, उन्हें पता है यह राह बहुत कठिन है। लेकिन वो फिर भी चलते हैं। इसी राह पर सोनिया चली, घर और समाज की बंदिश तोड़ कर चली। लेकिन क्या साहिल इस राह पर चल पाया। यही प्रश्न सोनिया ने साहिल से पूछा- मैंने तुम्हें अपना दिल दिया बस और बदले में तुम्हारा प्यार चाहती हूँ। बोलो क्या तुम मेरा साथ दोगे। (पृष्ठ-196)

इस प्रेम कथा के साथ एक और कथा है, वह है धार्मिक-साम्प्रदायिक। यह समाज में व्याप्त राजनीति के घिनौने रूप को पाठक के समक्ष लाती है। उपन्यास एक प्रेम कथा होने के साथ-साथ समाज में व्याप्त और भी बहुत सी बुराईयों का वर्णन करता है। समाज में औरत का क्या स्थान है और हम उसे कौन सा स्थान देते हैं। क्या हम औरत की इज्जत करते हैं? इस उपन्यास के संदर्भ में प्रकाशन ने भी लिखा है- क्या हमारी बेटियों की इज्जत का पैमाना इस बात पर निर्भर होगा कि वह लड़की किस जाति, धर्म और सम्प्रदाय की है। (प्रकाशक का कथन)

औरत होने की पीड़ा रज्जो तो भुगत रही है पर वह चाहती है की उसकी बेटी सोनिया न भुगते। उपन्यास में अंकुर का भी दोहरा व्यक्तित्व भी सामने आता है। वह स्वयं प्रेम करता है लेकिन अपनी बहन के प्रेम के प्रति सख्त है। अपनी बहन का यूँ ही किसी लड़के के साथ हँसी-मजाक करना, अंकुर को रास न आया। (पृष्ठ-82)

उपन्यास का मुख्य विषय 'लव जिहाद' है। क्या यह वास्तविक है, या काल्पनिक। क्या सच में कुछ ऐसा चल रहा है कि हमारी लड़कियों को 'दूसरे लोग' अपने प्यार में फंसा कर शादी करते हैं और इसके एवज में उन्हें रुपया-पैसा दिया जाता है। (पृष्ठ-203)

आखिर कौन है ये लोग? क्या है इनका मकसद? कौन फंसा लव जिहाद? क्या रहा परिणाम? इन प्रश्नों के उत्तर तो 'लव जिहाद...एक चिड़िया' उपन्यास पढकर ही मिल सकते हैं।  

भोपाल के पाठक मित्र बलविन्द्र सिंह ने इस उपन्यास पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि "इसे पढते वक्त आपके भाव कुछ और होंगे, समाप्त करने के बाद कुछ और।" जैसे-जैसे कहानी आगे बढती है वैसे- वैसे कहानी में रोचकता बढती जाती है। पाठक की जिस सोच के साथ उपन्यास आरम्भ होता है वह सोच पृष्ठ दर पृष्ठ बदलती रहती है। कभी सोच सकारात्मक होती है तो कभी नकारात्मक। एक अच्छे लेखक की यह खूबी है की वह कहानी में‌ निरंतर सस्पेंस और रोचकता बना कर रखे जो इस उपन्यास को पढते वक्त बना रहता है।

संवाद
 किसी भी कहानी के संवाद उसके महत्व को बढाने में सहायक होते हैं। संवाद पात्र और परिस्थितियों का वर्णन करने में सक्षम होते हैं। इस उपन्यास के संवाद भी बहुत अच्छे हैं।
जब ये दंगा होता है न, तो ये गाँव, इलाका‌ नहीं देखता- बस भड़कता जाता है और ऐसे में मारे जाते हैं गरीब, बूढे, बच्चे और औरतें।” (पृष्ठ-53)

“लड़कियों‌ का भी अजीब ही मसला है, खूबसूरत हो तो समाज में बैठे 'शिकारियों' का डर और खूबसूरत न हो तो लड़के वालों से शादी के इंकार का डर।” (पृष्ठ-81)

नारी की इज्जत, किसी भी धर्म, सम्प्रदाय, जाति और वर्ण से ऊपर होती है।” (पृष्ठ-175)

हमारी चेतना को झकझोरता यह उपन्यास हमारे समाज का विकृत चेहरा हमें दिखाता है। हम दोहरा आचरण अपनाकर जीते हैं जिसे यह उपन्यास बेनकाब करता है।
जब तक हम स्त्री के प्रति सोच नहीं बदलेंगे तब तक हमारा विकास भी अधूरा है।

उपन्यास- ‘लव जिहाद ...एक चिड़िया’
ISBN- 978-93-86276-55-1
लेखक -  राम पुजारी
प्रकाशक - गुल्ली बाबा, त्रिनगर. दिल्ली
पृष्ठ -   280
मूल्य -   180

GurPreet90x90.jpg

- गुरप्रीत सिंह

 (संप्रति : राजस्थान शिक्षा विभाग में लेक्चरर)

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#Book_ Review_: # ‘Love_Jihad #... Ek_Chidiya’ – #Ram_Pujari


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Ram Bhawan said :
Bahut hi acchi sameeksha ki, thank you. Hindianxpress & Gurpreet singh.
6/6/2019 2:17:00 AM
Gurpreet Singh said :
सामाजिक परिवेश पर आधारित यह उपन्यास बहुत अच्छा है। एक पठनीय उपन्यास । - गुरप्रीत सिंह www.svnlibrary.blogspot.in
6/6/2019 1:45:29 PM
S.s.tripathi said :
यह एक शानदार कालजयी रचना है ,लेखक ने ज्वलंत विषय को उकेरा है।राम पुजारी जी बधाई के पात्र हैं कि समाज के एक सामयिक विषय पर रचना लिखी और मानवतावादी संदेश दिया तथा निडर होकर अपने विचार रखे ।रचना संग्रहणीय,पठनीय और सराहनीय कृति है । प्रकाशक गुल्ली बाबा प.हाऊस को साधुवाद ।राम पुजारी जी को मंगल स्नेह ।
6/6/2019 4:59:29 AM
Rahul dua said :
Really this book is great I read it 2-3 times and also I want to suggest all of you to have it a try.
6/6/2019 4:23:32 PM

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