- मधुकांत वत्स
हिंदी कविता की वाचिक
परंपरा के उन्नायक एवं हिंदी भवन के संस्थापक पंडित गोपालप्रसाद व्यास की सातवीं
पुण्यतिथि पर हिंदी भवन के खचाखच भरे सभागार में आयोजित ‘काव्ययात्रा: कवि के मुख से’ कार्यक्रम के अंतर्गत गीत, मुक्तक,
ब्रज
के छंद और बेमिसाल लोकगीतों के वरिष्ठ एवं लोकप्रिय रचनाकार सोम ठाकुर का एकल
काव्यपाठ संपन्न हुआ। सोम ठाकुर ने इस काव्य संध्या में सभागार में उपस्थित सभी
काव्यप्रेमी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
काव्य संध्या का प्रारंभ
सोम ठाकुर ने अपने इस मुक्तक से किया -
कतरे
से समंदर तक गुमनाम सिलसिला हूं,
तोड़े
हजार बंधन पर कैद में रहा हूं।
कद
नापने को मेरा बेचैन आसमां है,
छोटा
हूं जिंदगी से पर मौत से बड़ा हूं।
इतना
ज्यादा मत हंसना मेरे मन,
जो
अनबरसा रह जाए सावन घन।
यदि
जीवन मुस्कानों के हाथ बिका,
आंसू
का कौन करेगा अभिनंदन।
लगभग 55 वर्ष पूर्व लिखा यह अद्भुत प्रेम गीत जिसे स्वयं
सोमजी ने अपनी पत्नी के अल्पकालीन विछोह पर लिखा -
लौट
आओ मांग के सिंदूर की सौगंध तुमको,
नयन
का सावन निमंत्रण दे रहा है।
क्या
बतलाएं हमने कैसे सांझ सवेरे देखे हैं,
सूरज
के आसन पर बैठे घने अंधेरे देखे हैं।
पर्वत, सागर, बिजली, बादल, गर्जन, गुंजन, मिले-जुले,
‘सोम’ कभी क्या
तूने बिखरे बाल निराला देखे हैं।
सोम ठाकुर की कविताओं में
प्रेम, विरह तथा दर्शन का अद्भुत
तालमेल दिखाई देता है।
समारोह के प्रारंभ में
हिंदी भवन के प्रबंधक श्री सपन भट्टाचार्य ने विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि एवं पूर्व
सांसद श्री उदयप्रताप सिंह का संक्षिप्त परिचय दिया। हिंदी भवन की न्यासी एवं
प्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मश्री गीता चंद्रन, इंिदरा मोहन, हरीशंकर बर्मन, संतोष माटा एवं निधि गुप्ता ने क्रमशः शाल, प्रतीक चिह्न, सम्मान राशि प्रदान कर सोम ठाकुर एवं श्री उदयप्रताप सिंह का पुष्पगुच्छ
देकर अभिनंदन किया।
हिंदी भवन के अध्यक्ष एवं
कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल श्री त्रिलोकीनाथ चतुर्वेदी के सान्निध्य में आयोजित इस
काव्य-संध्या में सोमजी का काव्यपाठ सुनने के लिए राजधानी के अनेक कवि, लेखक,
पत्रकार
और बुद्धिजीवी भारी संख्या में मौजूद थे। इनमें सर्वश्री गोविंद व्यास (मंत्री-हिंदी
भवन), अशोक चक्रधर, राजनारायण बिसारिया, कुंवर नारायण, दीक्षित ‘दनकौरी’,
रामनिवास
जाजू, शीला झुनझुनवाला, रमा पांडे, रत्ना कौशिक, वीरेंद्र प्रभाकर, उषा पुरी,
ममता
आशुतोष, किशोर कुमार कौशल, प्रभा जाजू, राज हिमानी, रमाशंकर दिव्य
दृष्टि, गिरीश भालवर, बृजमोहन शर्मा, सर्वेश ‘चंदौसवी’, नमिता राकेश आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।



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