- वी. के. शर्मा
(नई दिल्ली)
छोटी उम्र में बच्चे प्राय: एक से बढ़कर एक नई-नई शरारत करते हैं लेकिन उनकी शरारत
के लिए परेशान माँ-बाप को होना पड़ता है. ऐसा ही एक मामला रानी बाग़ क्षेत्र में देखने
को मिला. कल दोपहर यहीं के शकूरपुर कालोनी के रहने वाले संजय के ढाई वर्षीय पुत्र शिवम्
ने खेल ही खेल में ही घर में रखे प्रेशर कुकर को अपने पर रख तो लिया पर देखते ही
देखते उसने इसमें अपना सिर फंसा लिया. शुरू में तो उसे मजा आया पर कुछ देर तक जब उसका
सिर कुकर से बाहर नहीं निकला तो वह बड़े जोर से चिल्लाया. शिवम् के परिवार वाले उसे
हॉस्पिटल ले गए जहां पर डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जाकर कहीं उसके सिर पर फंसे
कुकर को काटकर हटाया जा सका.
मामला इस तरह था कि शिवम्
नित्य की तरह अपने घर में खेल रहा था. खेल खेल में
उसने वहीँ घर में रखा प्रेशर कुकर
अपने सिर में फसा लिया. पहले तो किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया लेकिन बाद में शिवम्
के चिल्लाने की आवाज पूरे घर में गूंजने लगी तो उसे सुनकर उसके घरवाले दौड़े दौड़े
आ गए और जब उन्होंने शिवम् का सिर कुकर में फंसे देखा तो सन्न रह गए. पहले तो उन्होंने
अपने आप ही कुकर निकालने का प्रयास किया लेकिन सफलता ना मिलती देखकर वे शिवम् को पास
के ही एक नर्सिंग होम में ले गए. लेकिन नर्सिंग होम वालों ने इस तरह का मामला पहले
कभी नहीं देखा था इसलिए उन्होंने अपने हाथ खड़े कर दिए और उन्हें तुरंत किसी बड़े हॉस्पिटल
में जाने की सलाह दी. तब परिवार वाले उसे रानी बाग़, पीतमपुरा के निकट भगवान् महावीर हॉस्पिटल
लेकर आये.
भगवान् महावीर हॉस्पिटल
में लगभग डेढ़ घंटे तक बचाव अभियान चलाया गया. इसमें दस-बारह डाक्टरों की सहायता से
आरी, पेचकस, कटर आदि का प्रयोग करते
हुए प्रेशर कुकर को
काटकर उसके सिर से हटाया गया. हॉस्पिटल में भी इस तरह का अनूठा
मामला पहली बार ही आया था. बचाव अभियान के दौरान शिवम् चिल्ला चिल्ला कर अपनी माँ को
पुकार रहा था. कठिनाई की बात यह थी कि सिर में फंसे होने के कारण प्रेशर कुकर को काटने
के लिए किसी तेज औजार को प्रयोग करना भी काफी कष्टकर हो सकता था. अत: काफी मात्रा में रूई का उपयोग
किया गया व एक आरी, पेचकस और कटर की सहायता से शिवम् के सिर पर फंसा प्रेशर कुकर हटाया जा सका. इस पूरे मामले को देखकर
हॉस्पिटल में आए दूसरे लोग भी बहुत हैरान थे. अंतत: शैतान शिवम् को अपनी गलती का एहसास
हो गया. शायद उसे सबक मिल चुका था और यह केवल शिवम् के लिए नहीं बल्कि और बच्चों
तथा उनके परिजनों के लिए भी एक सबक के रूप में लिया जाना चाहिए.
वी.के. शर्मा