- विशेष प्रतिनिधि
राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने 65वें
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश में विषम
लैंगिक अनुपात पर अत्यंत चिंता व्यक्त की।
राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने
कहा कि हमारी जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि
0-6 वर्ष तक के बच्चों के लैंगिक अनुपात में कमी आई है। अब यह घटकर एक हजार लड़कों के
मुकाबले नौ सौ चौदह लड़कियों तक आ गया है। इससे हमारे समाज में लड़कों के लिए
प्राथमिकता का तथा लड़कियों के साथ भेदभाव का पता चलता है। यह बड़े ही चिंता की बात
है।
उन्होंने कहा “हमें ऐसे सामाजिक भेदभावों से लड़ना होगा
जिनके चलते यह स्थिति पैदा हुई है और दहेज, बाल-विवाह
तथा बालिका भ्रूण-हत्या जैसी प्रथाओं के उन्मूलन के भी प्रयास करने होंगे। इनका
हमें आज इक्कीसवीं सदी में भी सामना करना पड़ रहा है। देश के हर नागरिक को इन
सामाजिक कुरीतियों से लड़ने की शपथ लेनी होगी। इन बुराइयों के खिलाफ पहले ही कानून
मौजूद हैं परंतु हमें जागरूकता पैदा करनी होगी तथा इनका पालन सुनिश्चित करना होगा।”
“इसके साथ ही महिलाओं के विरुद्ध अपराधों
से बहुत सख्ती से निपटना होगा। महिला और पुरुष राष्ट्र-रथ के दो पहिए हैं और दोनों
का मजबूत होना जरूरी है। महिलाओं में सामर्थ्य और क्षमता है। यदि उन्हें अवसर दिया
जाए तो वे किसी भी क्षेत्र में योगदान कर सकती हैं। हमने अपने देश में स्व-सहायता
समूहों की सफलता देखी है। इनमें लगभग 80 प्रतिशत, सर्व-महिला
समूह हैं। ये समूह निम्न आर्थिक स्थिति में कार्यरत हैं तथा छोटे पैमाने पर अपनी
गतिविधियां चलाते हैं। इन समूहों ने महिलाओं को न केवल आर्थिक गतिविधियों के मौके
उपलब्ध कराए हैं बल्कि उनमें आत्मविश्वास तथा आत्मनिर्भरता की भावना भी जगाई है। सरकार
को बढ़-चढ़कर इस आंदोलन को सभी जगह फैलाने के उपाय करने चाहिए। ये महिला सशक्तीकरण
के हमारे लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उपयोगी होंगे।”