Font Sign In / Register
शब्दकोश Dictionary
अंग्रेज़ी-हिन्दी शब्द अनुवाद
 
www.swargvibha.tk
 
Opinion Poll
No-ball incident has made our players more aggressive, says M S Dhoni. Do you agree?
Yes
No
Can't Say
Please answer this simple math question 6 + 1 = 7
   
 
Social Media
 
 
 
 
 
Email
ईश्वरीय चमत्कार न सही इंजीनियरिंग की मिसाल तो है - अनिल पुसदकर
11/21/2011 11:50:43 AM
Post Your Review

- अनिल पुसदकर

त्रिवेणी संगम के बीच सदियों से अक्षत खड़ा आठवीं सदी का कुलेश्वर महादेव मंदिर बहुत से लोगों के लिए ईश्वरीय चमत्कार से कम नहीं है, और जो ईश्वर पर आस्था नहीं रखते उनके लिए भी कम से कम इंजीनियरिंग की मिसाल तो है ही। इसी नदी पर बना पुल 40 साल भी नहीं टिक पाया है और यह खड़ा है सदियों से जस का तस।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मात्र 45 कि.मी. दूर है पवित्र नगरी राजिम। यहां पैरी, सोंढूर और महानदी का त्रिवेणी संगम है। नदी के एक किनारे भगवान राजीवलोचन का मंदिर है और नदी के बीच में कुलेश्वर महादेव का। नदी के ठीक किनारे महादेव का एक और मंदिर है जिसे मामा का मंदिर भी कहा जाता है। कुलेश्वर महादेव को भाँजे का मंदिर कहते है। ऐसी मान्यता है कि बाढ़ में जब कुलेश्वर महादेव का मंदिर डूबता था तो वहां से आवाज़ आती थी मामा बचाओ। इसीलिए यहां नाव पर मामा-भाँजे को एक साथ सवार होने नहीं दिया जाता। खैर यह तो है आस्था और कहावतों की बात।

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि सातवीं-आठवीं शताब्दी का यह मंदिर आज भी खड़ा है मौसम को चुनौतियाँ देता हुआ। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसी नदी पर मंदिर से कुछ ही दूरी पर नयापारा और राजिम दोनों बस्तियों को जोड़ने वाला पुल है। सन् 1971 में यातायात के लिए खोला गया यह नेहरू पुल आज खस्ताहाल होकर खतरनाक स्थिति में पहुँच गया है। आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना 40 साल भी नहीं टिक पाया है और उसी जलधारा के बीचों-बीच खड़ा कुलेश्वर मंदिर उस काल की स्ट्रक्चरल, जियोलॉजिकल और इंजीनियरिंग के ज्ञान का प्रमाण दे रहा है।

बरसात के दिनों में बाढ़ का पानी कई-कई दिनों मंदिर को डुबाए रखता है। हाल में तो नदी का गुस्सा कम नज़र आता है लेकिन कुछ सालों पहले जब उसे बांधों से नहीं TriveniMandir-340X230.jpgबांधा गया था तो उसकी उफनती जलधारा क़हर बरपाती जाती थी। इसके बावजूद लाखों क्यूसेक बाढ़ के पानी का दबाव अपने बेहतरीन अष्टकोणीय ढाँचे पर आसानी से झेलता आ रहा है कुलेश्वर महादेव। मंदिर का आकार 37.75 गुना 37.30 मीटर है। इसकी ऊँचाई 4.8 मीटर है मंदिर का अधिष्ठान भाग तराशे हुए पत्थरों से बना है। रेत एवं चूने के गारे से उनकी जोड़ाई हुई है। इसके विशाल चबूतरे पर तीन तरफ से सीढ़ियाँ बनी हुई है। नदी की गहराई निरंतर रेत के जमाव से कम हो चुकी है इसलिए मंदिर का चबूतरा लगभग डेढ़ मीटर गहराई तक रेत में ढका हुआ माना जाता है। इसी चबूतरे पर पीपल का एक विशाल पेड़ भी है।

चबूतरा अष्टकोणीय होने के साथ ऊपर की ओर पतला होता गया है। यहां उस काल के भवन निर्माताओं के भू-गर्भ विज्ञान के कौशल का पता चलता है। उन्होंने लगभग 2 कि.मी. चौड़ी नदी के बीच और जहां देखो वहां तक फैले रेत के समुंदर के बीच इस मंदिर की नींव के लिए ठोस चट्टानों का भूतल ढूंढ निकाला था। एकदम बारीक बालू से भरी नदी के बीच एक इमारत को खड़ा करना और उसे सदियों तक टिका रहने लायक बनाने के लिए की गई साइट सिलेक्शन आज के पढ़े-लिखे अत्याधुनिक निर्माणकर्ताओं के लिए आदर्श प्रस्तुत करती है।

तमाम धारणाओं-अवधारणाओं के बावजूद कुलेश्वर महादेव की संरचना जल प्रवाह से होने वाले परिणाम जैसे क्षरण, भू-स्खलन, आर्द्रता और ताप प्रतिरोध से आज तक TriveniMandir-435X250.JPGसुरक्षित है। संरचना स्थानीय भूरा बलुवा और काले पत्थरों से बनी हुई है। नदी की धारा इस अष्टकोणीय संरचना से टकराकर विकेंद्रित और अभिसरित हो जाती है। प्रवाह के साथ बहने वाले रेत के घर्षण से भी यह अप्रभावित ही है। इंजीनियरिंग की यह शानदार मिसाल आस्था और धर्म को छोड़कर भी अपनी उत्कृष्टता का कायल कर देती है। हां अगर मान्यताओं की बात करें तो ऐसा कहा जाता है कि नदी किनारे बने मामा के मंदिर के शिवलिंग को जैसे ही नदी का जल छूता है उसके बाद बाढ़ उतरनी शुरू हो जाती है। सावन के इस पवित्र महीने में तो श्रध्दालुओं का वहां तांता लगा रहता है, वैसे साल भर लोग यहां भगवान शंकर के दर्शन के लिए आते रहते हैं। इसके निर्माण के काल पर विवाद हो सकता है लेकिन राजिम के अन्य मंदिर सातवीं-आठवीं शताब्दी के हैं इसलिए इसे भी उसी काल का माना जाता है। यह राज्य सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक है और यह प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ में मरीन इंजीनियरिंग, जियोलॉजी और कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग के अत्यंत विकसित होने का सबूत देता है।

 9fa389f2-56ec-4a81-bf33-136d96b5964d.jpg

अनिल पुसदकर

 *****

 

    Shubham-OK-529X180.JPG

,



 

Dheerendra Arora said :
विलक्षण! चित्र और जानकारी अनुपम है.
11/22/2011 6:47:44 AM
Swarn Prakash said :
जानकारी देने वाला लेख है जिसे पढ़ कर अच्छा लगा.
11/24/2011 7:24:32 AM
Harit Chowdhry said :
ऐसी रोचक और ज्ञानवर्द्धक जानकारी के लिए लेखक को साधुवाद.
11/22/2011 8:03:04 AM
Shri Ram Pathak said :
बहुत ही उत्तम. कृपया ऐसी ज्ञानवर्द्धक जानकारी देते रहें.
11/22/2011 6:29:37 AM
Dr Shashi Mohan Sharma said :
बहुत ही उत्तम और ज्ञानवर्द्धक जानकारी देने वाला लेख है
11/30/2011 12:36:47 AM

Post Your Review

Your Name  
Your Email  
Your Comment:
Type in Hindi (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi)
 
      
 
 
Go To Top
 
Login

     
 
                 

             

New User! Register Here.
Forgot Password?
 
 
 
 
Online Reference
Dictionary, Encyclopedia & more
Word:
by:
 
Traffic Rank
 
 
About Us  |   Contact Us   |   Term & Conditions   |   Disclaimer  |   Privacy Policy  |   copyright © 2010... Powered by : InceptLogic